दिल्ली पुलिस ने जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों को हिरासत में लिया, विरोध प्रदर्शन जारी

Delhi Police detains Jamia Millia Islamia students, protests continue

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (13 फरवरी) को जामिया मिलिया इस्लामिया के कई छात्रों को हिरासत में लिया। यूनिवर्सिटी प्रशासन की शिकायत पर इन छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी छात्र पिछले चार दिनों से पीएचडी छात्रों के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। आरोप है कि इन छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान यूनिवर्सिटी कैंटीन को बंद करवा दिया और उसके बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहे। इसके अलावा, बुधवार को इन छात्रों ने कैंटीन के बाहर तोड़फोड़ भी की थी।

क्या था विरोध का कारण?
जानकारी के अनुसार, साल 2019 में जामिया में पुलिस फायरिंग के विरोध में पीएचडी के दो छात्र उसकी बरसी मनाना चाहते थे, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद, ये छात्र अपने अन्य साथियों के साथ कार्यक्रम कर रहे थे। इस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया। जब छात्रों की तरफ से इस नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं आया, तो विश्वविद्यालय ने इन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का फैसला लिया, जिसके बाद उन्होंने हिंसक प्रदर्शन किया।

छात्रों की प्रमुख मांगें
विरोध कर रहे छात्रों की कई मांगें थीं। इनमें मुख्य रूप से कॉमरेड सौरव के खिलाफ अनुशासन समिति की बैठक के निर्णय को रद्द करना और छात्रों की आवाज़ उठाने के लिए विभिन्न छात्रों के खिलाफ जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को निरस्त करना शामिल था। इसके अलावा, 29 अगस्त 2022 और 29 नवंबर 2024 के कार्यालय ज्ञापनों को भी रद्द करने की मांग की गई।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी मांग की कि जामिया की दीवारों पर पोस्टर लगाने और भित्तिचित्र बनाने पर लगाए गए जुर्माने को रद्द किया जाए और यूनिवर्सिटी परिसर में प्रदर्शन करने वाले किसी भी छात्र को भविष्य में कारण बताओ नोटिस जारी न किया जाए, क्योंकि इससे उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला होगा, जिसे वे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।

क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2024 में, पीएचडी छात्रों ने 2019 में दिल्ली पुलिस के रवैये के विरोध में ‘जामिया प्रतिरोध दिवस’ मनाने का निर्णय लिया था, जिसकी अनुमति विश्वविद्यालय प्रशासन से नहीं मिली थी। इसके बाद, प्रशासन ने छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन छात्रों की ओर से इस नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विश्वविद्यालय ने इनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

(Source – IANS)

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